पाकिस्तान जैसे देश से किसी को भी मानवाधिकारों पर भाषण सुनने की जरूरत नहीं : भारत

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा

Updated Tue, 15 Sep 2020 10:49 PM IST

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

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मानवाधिकार काउंसिल के 45वें सत्र में राइट ऑफ रिप्लाई (जवाब देने का अधिकार) के दौरान जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। मिशन के प्रथम सचिव पवन बढ़े ने कहा कि अपने हितों को पूरा करने के लिए झूठी और मनगढ़त कहानियां बना कर भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना पाकिस्तान की आदत बन गई है। उन्होंने कहा कि पाक ने अल्पसंख्यकों पर बहुत अत्याचार किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘मानवाधिकारों को लेकर भारत या अन्य देशों को ऐसे देश से भाषण सुनने की जरूरत नहीं है जिसने लगातार अपने धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किए हैं, जो आतंकवाद का केंद्रबिंदु बना हुआ है, जो संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल लोगों को पेंशन दे रहा है और जिसका प्रधानमंत्री गर्व से जम्मू-कश्मीर में लड़ाई के लिए हजारों आतंकियों को प्रशिक्षण देने की बात को गर्व से स्वीकार करता है।’

पवन बढ़े ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वाह जैसे इलाकों में स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वाह और सिंध प्रांत में इसके (पाकिस्तान) अधीनस्थ रहने वाले लोगों की दुर्दशा को अच्छी तरह से दर्शाया गया है। बलूचिस्तान में एक भी दिन ऐसा नहीं गया है जब वहां के किसी परिवार को यह पता न चला हो कि उनके परिवार के किसी सदस्य का पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने अपहरण कर लिया है। 

जम्मू-कश्मीर को लेकर ओआईसी और तुर्की को भी दो टूक

मिशन के प्रथम सचिव ने कहा कि हम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को लेकर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) की ओर से दिए गए संदर्भ को अस्वीकार करते हैं। पाकिस्तान ओआईसी का दुरुपयोग कर रहा है। यह ओआईसी को तय करना होगा कि क्या पाक को ऐसा करने देना उसके हित में है। बढ़े ने कहा, ‘मैं तुर्की को फिर से सलाह देता हूं कि वह भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणियां न करे।’

मानवाधिकार काउंसिल के 45वें सत्र में राइट ऑफ रिप्लाई (जवाब देने का अधिकार) के दौरान जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। मिशन के प्रथम सचिव पवन बढ़े ने कहा कि अपने हितों को पूरा करने के लिए झूठी और मनगढ़त कहानियां बना कर भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना पाकिस्तान की आदत बन गई है। उन्होंने कहा कि पाक ने अल्पसंख्यकों पर बहुत अत्याचार किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘मानवाधिकारों को लेकर भारत या अन्य देशों को ऐसे देश से भाषण सुनने की जरूरत नहीं है जिसने लगातार अपने धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किए हैं, जो आतंकवाद का केंद्रबिंदु बना हुआ है, जो संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल लोगों को पेंशन दे रहा है और जिसका प्रधानमंत्री गर्व से जम्मू-कश्मीर में लड़ाई के लिए हजारों आतंकियों को प्रशिक्षण देने की बात को गर्व से स्वीकार करता है।’

पवन बढ़े ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वाह जैसे इलाकों में स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वाह और सिंध प्रांत में इसके (पाकिस्तान) अधीनस्थ रहने वाले लोगों की दुर्दशा को अच्छी तरह से दर्शाया गया है। बलूचिस्तान में एक भी दिन ऐसा नहीं गया है जब वहां के किसी परिवार को यह पता न चला हो कि उनके परिवार के किसी सदस्य का पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने अपहरण कर लिया है। 

जम्मू-कश्मीर को लेकर ओआईसी और तुर्की को भी दो टूक

मिशन के प्रथम सचिव ने कहा कि हम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को लेकर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) की ओर से दिए गए संदर्भ को अस्वीकार करते हैं। पाकिस्तान ओआईसी का दुरुपयोग कर रहा है। यह ओआईसी को तय करना होगा कि क्या पाक को ऐसा करने देना उसके हित में है। बढ़े ने कहा, ‘मैं तुर्की को फिर से सलाह देता हूं कि वह भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणियां न करे।’

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