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चुनावी हलफनामे पर उद्धव, बेटे आदित्य और पवार को इनकम टैक्स का नोटिस, राकांपा प्रमुख बोले- केंद्र को मुझसे कुछ ज्यादा ही प्यार है

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मुंबई3 घंटे पहले

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शरद पवार ने कहा कि सुशांत के मुद्दे पर तीन महीने से लगातार बात जारी है, किसानों की आत्महत्या की किसी को परवाह नहीं। -फाइल फोटो

  • शरद पवार ने कहा कि केंद्र सरकार उनके खिलाफ प्रोपेगैंडा खड़ा कर रही है
  • राज्यसभा से निलंबित 8 सांसदों के समर्थन में पवार ने एक दिन के उपवास का ऐलान किया है

चुनावी हलफनामे को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे और बारामती से राकांपा सांसद सुप्रिया सुले समेत कुछ अन्य राजनेताओं को इनकम टैक्स का नोटिस मिला है। सोमवार को मुंबई में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राकांपा प्रमुख शरद पवार ने इसकी पुष्टि भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ नोटिस भिजवाकर उनके खिलाफ प्रोपेगैंडा खड़ा कर रही है। उन्होंने तंज कसा कि वे (केंद्र सरकार) मुझे बहुत चाहते हैं।

पिछले कुछ महीनों से भारतीय जनता पार्टी और महाराष्ट्र सरकार के बीच तनाव जारी है। इस बीच ये नोटिस सामने आने के बाद अब फिर विवाद बढ़ना स्वाभाविक है। शरद पवार और शिवसेना की ओर से लगातार कृषि बिल का विरोध किया जा रहा है।

निलंबित सांसदों के समर्थन में एक दिन का उपवास
उन्होंने इस दौरान यह भी बताया कि राज्यसभा में बवाल के बाद निलंबित आठ सदस्यों के समर्थन में वह एक दिन का उपवास रखेंगे। ऐसा कर वह भी उनके आंदोलन में साथ देंगे। मुंबई में शरद पवार ने कहा, ‘मेपी प्रदर्शन करने वाले सदस्यों के साथ मेरी एकजुटता है, इसलिए मैं कुछ भी नहीं खाऊंगा।’

मैंने ऐसे बिल पास होते नहीं देखा : पवार
राज्यसभा में कृषि बिल के मुद्दे पर पवार ने कहा, ‘मैंने इस तरीके से कभी भी बिल पास होते हुए नहीं देखे। वे (सरकार) इन्हें जल्दी पास कराना चाहते थे, जबकि सदस्यों के इन्हें लेकर सवाल थे। शुरुआती तौर पर ऐसा ही लगता है कि वे चर्चा नहीं चाहते थे। जब सदस्यों को इस पर जवाब नहीं मिला, तभी वे सदन के वेल में आ गए। इन सदस्यों को अपनी राय जाहिर करने को लेकर निलंबित किया गया। डिप्टी चेयरमैन ने नियमों को प्राथमिकता नहीं दी।’

सुशांत के मामले में लगातार चर्चा, किसानों पर कोई ध्यान नहीं
पवार ने आगे कहा, ‘एक खुदकुशी के मामले (बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत) के बारे में तीन महीने तक बात की जाती है। अन्य मुद्दों को नजरअंदाज करना ठीक बात नहीं है। किसान भी आत्महत्या कर रहे हैं। सरकार को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए।’

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